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सुबह-ए- बनारस डाल रहा है गरीब बच्चों के शिक्षा में बाधा

बनारस की सुबह दुनियाभर में प्रसिद्ध है। यहां की सुबह देखने के लिए विदेशों से भी मेहमान खींचे चले आते हैं। कुछ साल पहले ही शासन ने 'सुबह-ए-बनारस' को खास बनाने के लिए वाराणसी के अस्सी घाट पर ऐसे कार्यक्रम की शुरुआत की जिसमें बनारस की संस्कृति के साथ-साथ वाराणसी की पहचान भी लोगों को देखने को मिले।

हर सुबह बनारस में गंगा किनारे आरती और शास्त्रीय संगीत की धुन बरबस ही सैलानियों को आकर्षित करती है। अस्सी घाट का सांस्कृतिक कार्यक्रम ‘सुबह-ए-बनारस’ अस्सी घाट पर आयोजित संगीत समारोह सुबह-ए-बनारस की शान की शान है। यह घाटों की ठाठ में चार-चांद लगा रहा है।  सुबह के रागों पर आधारित यह आयोजन होता है। यहां बेहद आकर्षक नृत्य का कार्यक्रम होता है। यह कार्यक्रम भारतीय संस्कृति व परंपरा को बढ़ावा देने वाला है।इसकी थीम जापान के शिन्तो धर्म  से प्रेरित है शिन्तो अर्थात कामियों का मार्ग। जापान का एक प्रमुख और मूल धर्म है। इसमें कई देवी-देवता हैं जिनको कामी कहा जाता है। कामी का अर्थ महान, अद्भुत, पवित्र जीव होता है। हर कामी किसी न किसी प्राकृतिक शक्ति का प्रतिनिधित्व करता है। एक जमाने में शिन्तो धर्म जापान का राजधर्म हुआ करता था। इसका जापान के सांस्कृतिक, धार्मिक विकास, राष्ट्रीय जीवन में स्थिरता लाने में महत्वपूर्ण योगदान है। हिंदू धर्म की तरह इसमें भी अनेकेश्वरवाद को मान्यता मिली है। अनेक देवी देवताओं के समूह पूजे जाते रहे हैं जिनमें ‘अनाटेरा सुओमी कामो’यानी सूर्य-देवी को प्रमुखता दी गई है।

जब से सुबह-ए- बनारस कार्यक्रम शुरू हुआ है बनारस के सांस्कृतिक कार्यक्रम के नाम पर तब से यही हाल है, कार्यक्रम से जुडे कई लोग हैं जो क्षेत्र विशेष (घाट) को अपने बाप की बपौती समझते हैं.... सुनने में तो अब यह भी आ रहा है कि वहां कोई भी अब कार्यक्रम होता है तो सुबह-ए- बनारस के लोग कार्यक्रम स्थल को अपनी बपौती बताकर मोटी कमाई करते हैं..और हो सकता है कि गरीब बच्चों को पढाने वाले लोगों द्वारा इनको पैसा ना देना खल रहा हो इसलिए ये लोग इस नेक काम में व्यवधान उत्पन्न कर रहे हो..

रत्नेश वर्मा जिला सांस्कृतिक समिति के सचिव है शुरु में जिला प्रशासन से धन मिलता था अब वो बंद है ! अब यह सब " सुबह-ए- बनारस आनन- कानन " नाम से रजिसट्रेशन करवा कर सदस्यता शुल्क ५ हजार लेते है और कोई सोशल कार्यक्रम अस्सीघाट पर करने आता है तो उससे पैसा लेते है ! जो नही देता उसको अनुमति का भय दिखाकर भगा देते है ! इसके पहले सब बजडा सुसज्जित करवा कर २५ सौ प्रति आदमी से लेकर नौका विहार कराते थे लेकिन मल्लाहों के विरोध के कारण सब बंद कर दिए  उसका ताजा हाल ये है की  सुबह-ए- बनारस डाल रहा है गरीब बच्चों के शिक्षा में बाधा

इनरव्हील क्लब उदया (
यह संस्था है महिलाओं का) ओर से अस्सीघाट पर गरीब बच्चों के लिए पीएम की महत्वाकांक्षी योजना के तहत चलाये जा रहे नि: शुल्क साक्षरता कार्यक्रम में सुबह- ए-बनारस के जिम्मेदार लोग बाधा पहुंचा रहे है | अस्सीघाट पर प्रतिदिन सायं ६ से ७ बजे तक ३५ गरीब बच्चों को जो स्कूल नहीं जाते है उन्हें संस्था की महिलाए सभी पाठ्य सामग्री नि: शुल्क मुहैया करा कर बेसहारा बच्चों शिक्षित करने का अभियान चलाया हैं | उपरोक्त कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ गत २० मार्च को बीएचयू के कुलपति प्रो जी सी त्रिपाठी के मुख्य आतिथ्य में हुआ था | बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा देने वाले संस्था कि महिलाओं ने यह आरोप लगाया है कि अस्सीघाट पर सुबह-ए- बनारस के एक जिम्मेदार व्यक्ति द्वारा प्रतिदिन किसी न किसी तरह से इस नेक कार्य में बाधा डाली जा रही है | यह कहा जा रहा है कि बिना मेरी अनुमति के इस घाट पर कोई भी सामाजिक कार्य नही किया जा सकता है | साथ ही अब यह भी कहा जा रहा है कि यह कार्य परिसर से बाहर किया जाय जबकि घाट सार्वजनिक होता है कोई परिसर नही है | इस मामले कि शिकायत महिलाओं ने स्थानीय पार्षद श्री गोबिन्द शर्मा से शिकायत की तो पार्षद ने तत्काल इस घटना की जानकारी जिलाधिकारी श्री राजमणि से की | इस पर डीएम ने हर संभव गरीब बच्चों को नि: शुल्क साक्षरता अभियान से जोडने के लिए सहयोग एवं मदद करने का भरोसा दिया | ज्ञातव्य है कि सुबह-ए- बनारस कार्यक्रम के लिए महज २ घंटे के लिए प्रशासन से अनुमति है जबकि इस भीषण गर्मी में देश- विदेश से आने वाले पर्यटकों को काफी परेशानीयों का समना करना पड रहा है क्योकि नये अस्सीघाट पर पर्यटकों के लिए बने दोनों आश्रय स्थल पर २४ घंटे सुबह-ए- बनारस का कब्जा रहता है | इसके पूर्व वाराणसी विकास प्राधिकरण ने सुबह-ए- बनारस द्वारा अवैध रुप से आश्रय स्थल पर बने चबुतरे को तोड भी दिया था इसके बावजूद वहां फिर से अतिक्रमण कर चबुतरा बना दिया गया है | इस मामले को लेकर स्थानीय नागरिकों में भारी आक्रोश है |


वहां चाय की दूकान आर्थिक लाभ के लिए जब खुलवाई जा सकती है तो बेसहारा बच्चों को एक घंटा नि: शुल्क शिक्षा क्यों नहीं दी जा सकती है | समर कैंप तो रईसों के बच्चों के मनेरंजन के लिए घाटों पर लगाये जाते है ताकि उसका आर्थिक लाभ लोग उठा सकें

एक संस्कृति से जुडा हुआ मामला है तो एक देश के शिक्षा से... इसमें शाशन को अपने और से पहल करनी होगी...  इस शिक्षा अभियान को भी सुबहे बनारस में जोड़कर जिलाधीश महोदय द्वारा सुबहे बनारस को सार्थक बनाना चाहिए।इस सन्दर्भ में क्षेत्र के कई बुद्धिजीवी भी अपनी सेवाएं निशुल्क देना चाहते हैं।किन्तु कुछ खास दबंगों द्वारा सुबहे बनारस को अपनी जागीर समझने से वे निराश हैं।


























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रेल टिकट कन्फर्म होगा कि नहीं,

रेलवे का वेटिंग टिकट कंफर्म होगा कि नहीं इसको लेकर यात्री परेशान रहते हैं. उहापोह की स्थिति बनी रहती है. अब उन्हें इस झंझट से मुक्ति मिलेगी.

         http://confirmtkt.com/  बताता है वेट लिस्ट टिकट कन्फर्म होंगी कि नहीं

कैसे डेवलप हुई वेबसाइट
इस वेबसाइट को दो इंजीनियरों दिनेश और श्रीपद ने बनाया है. दिनेश ने एनआइटी, जमशेदपुर से जबकि श्रीपद ने सास्त्र यूनिवर्सिटी, तंजौर से पढ़ाई की है. ये दोनों आइबीएम में काम करते थे. टिकट कंफर्मेशन की परेशानी ङोलने के बाद इसका उपाय खोजने में लग गये और कामयाब हुए. रेलवे बोर्ड इन दोनों को सम्मानित कर सकती है. दोनों युवाओं ने टिकटों के कंफर्म होने के टाइमिंग का पता लगा कर आंकड़ों का विेषण किया. शुरुआत में वेबसाइट की सटीकता(एक्यूरेशी) 88 फीसदी थी जो बढ़ कर 94 फीसदी हो गयी है.

कैसे काम करेगी वेबसाइट
यह वेबसाइट लोगों की सोच की तरह काम करता है. जैसे लोगों को अपने अतीत के अनुभवों से सीख मिलती है. उसी तरह यह वेबसाइट हर ट्रेन की वेटिंग लिस्ट टिकट के इतिहास के आधार पर भविष्यवाणी करेगा. यह इस तरह से डिजाइन किया गया है कि यह प्रयोगकर्ताओं के अनुभवों को भी समेटता जायेगा.

स्मार्टफोन के लिए स्मार्टएप्प भी
तकनीकी युग में जहां रिचार्ज से लेकर शॉपिंग तक मोबाइल एप्लीकेशन के रूप में मौजूद है, ऐसे में इस वेबसाइट ने भी स्मार्टफोन पर अपना स्मार्ट एप्प जारी किया है. इस वेबसाइट के एंड्रॉयड एप्लीकेशन को मोबाइल फोन में डाउनलोड किया जा सकता है. यह एप्प वेटिंग लिस्ट टिकट के बारे में भविष्यवाणी करके बतायेगा कि आपका टिकट कंफर्म होगा या नहीं. वेटिंग टिकट की स्थिति में यह आपको मेल करके सूचित करता है कि आपके वेटिंग लिस्ट टिकट के कंफर्म होने की संभावना कितनी है. उसके कंफर्म होने पर आपको सूचना भी देता है.
दो युवा इंजीनियरों ने इसका समाधान एक वेबसाइट के रूप में निकाल लिया है. रेलवे बोर्ड इन युवा इंजीनियरों को सम्मानित करने पर विचार कर रहा है.

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ये तो बीजेपी का आई टी सेल है

विष का उत्स :
हम तो सब पर नज़र रखते हैं जी



आइये आपको दिखाते हैं कहा से आपको दी जाती है गालियाँ अगर आप मोदी के विरोध में सोशल मीडिया पर कुछ भी लिखते हैं


अगर आप मोदी-भक्तों की गालियों को सीरियसली लेते हैं तो यह पोस्ट खासकर आपके लिए है. दरअसल जो बेचारे युवा गण मोदी जी के लिए अपनी जान न्योछावर करते नज़र आते हैं या फिर उनकी शान में उनकी तरफ से भद्दी भद्दी गालियाँ बकते हैं वो नाम और आई डी रियल होती ही नहीं है. बीस से पैतीस हज़ार रुपये पाने के लिए बेरोजगार युवा मजबूर होते हैं ऐसा करने के लिए.

तस्वीर में आप साफ़ देख सकते हैं कि सोशल मीडिया पार जो भाषा ये लोग इस्तेमाल करते हैं दरअसल वो मोदी या उनके ख़ास लोगों के इशारे पर होता है. फिर इन्हें सीरियसली क्यूँ लेना.

बीजेपी भी असलियत जानती है कि ये फेक आई डी वोट दिलाने में कितना कामयाब हो पायेंगे और कितना नाकाम ..
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दिग्विजय की शादी में सनी करें स्ट्रिप डांस, दूंगा एक करोड़', पढ़ें कौन बोला


मुंबई. ट्वीट्स को लेकर हमेशा विवादों में रहने वाले अभिनेता और पॉलिटिशियन कमाल राशिद खान यानी केआरके एक बार फिर चर्चा में हैं। इस बार उन्होंने एक्ट्रेस सनी लियोनी को निशाना बनाया है। सनी ने उनके खिलाफ पुलिस में शिकायत की है। सनी ने केआरके पर ट्विटर पर उन्हें अपमानित करने का आरोप लगाया है। ख़बरों की मानें तो केआरके ने बीते दिनों एक ट्वीट में सनी लियोनी का स्ट्रिप शो कराने की इच्छा जताई थी और इसके लिए एक करोड़ रुपए अदा करने की बात कही थी। उन्होंने यह शो कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह और पत्रकार अमृता राय की शादी में कराने की इच्छा जताई थी।

क्या लिखा था ट्वीट में :

केआरके ने ट्वीट में लिखा था, "मैं दिग्विजय सिंह जी से निवेदन करता हूं कि वे अपनी शादी में सनी लियोनी का स्ट्रिप शो कराएं। इसके एवज में मैं कांग्रेस के पार्टी फंड में एक करोड़ रुपए जमा कराऊंगा।"

सनी लियोनी ने दर्ज कराया मुकदमा :

इस ट्वीट को देखने के बाद सनी के वकील रिजवान सिद्धिकी ने केआरके के खिलाफ ताजा मामला दर्ज कराया है। एक लीडिंग अखबार से बात करते हुए सिद्धिकी ने मामले का खुलासा किया। इस दौरान उन्होंने यह भी बताया कि पुलिस इस शिकायत को गंभीरता से नहीं ले रही है। उन्होंने कहा कि इतने गंभीर मुद्दे पर भी पुलिस ढीला रवैया अपना रही है। सिद्धिकी ने पुलिस को चेतवानी देते हुए कहा है कि यदि वह मामले को सुलझाने में असफल रहती है तो उसके खिलाफ भी शिकायत की जाएगी।


पहले भी दर्ज कराया जा चुका है मामला :

यह पहला मौक़ा नहीं है, जब सनी लियोनी ने केआरके के खिलाफ अपमानित करने का आरोप लगाया है। इससे पहले भी एक बार उनके खिलाफ शिकायत दर्ज करा चुकी हैं। बात फरवरी 2013 की है, सनी ने साइबर क्राइम इन्वेस्टीगेशन सेल को शिकायत करते हुए बताया था कि केआरके सोशल साइट्स पर उनके खिलाफ अपशब्द इस्तेमाल कर उन्हें अपमानित कर रहे हैं। दरअसल , एक रेप केस के संदर्भ में सनी ने एक बयान दिया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि रेप अपराध नहीं है। सनी के इस बयान के बाद केआरके ने उनपर चुटकी लेते हुए ट्वीट किया था, "ये लो...सनी लियोनी कहती हैं, रेप एक अपराध नहीं है, यह तो सरप्राइज सेक्स है।" कमाल के इस ट्वीट के बाद सनी ने उनके खिलाफ शिकायत की थी।


सनी लियोनी को लिया था निशाने पर :

सनी लियोनी अक्सर कमाल खान के निशाने पर रही हैं। हाल ही में उनसे स्ट्रिप शो कराने की इच्छा जाहिर कर चुके केआरके  उनके साथ फिल्म करने की इच्छा जाहिर कर चुके हैं। उन्होंने ट्विटर पर यह इच्छा जाहिर की थी कि वे सनी के साथ देशद्रोही-2 बनाना चाहते हैं, जो 6डी में होगी। ऐसा क्यों? यह आप केआरके का वह ट्वीट पढ़कर खुद जान जाएंगे। उन्होंने अपने ट्विटर अकाउंट पर लिखा था, "मैं सनी लियोनी के साथ देशद्रोही-2 बनाना चाहता हूं। यह फिल्म 6डी में होगी, ताकि लोग सनी की एक्टिंग आराम से देख सकें...या..या..या..ओह..या..कम ऑन बीप बीप बीप..."


धनुष को कह चुके जमादार :

साल 2013 में रिलीज हुई आनंद राय निर्देशित 'रांझणा' के रिव्यू वीडियो में कमाल ने आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। इस बार उनके निशाने पर थे साउथ स्टार धनुष। धनुष ने 'रांझणा' से बॉलीवुड में डेब्यू किया है। इस फिल्म में उनके साथ सोनम कपूर ने अभिनय किया है। अपने रिव्यू में कमाल ने कहा था, "सर, मैं नहीं जानता कि आप यूपी के हैं या नहीं। लेकिन मैं यूपी का हूं। यूपी में आपको धनुष की शक्ल जैसे ***** और जमादार तो दिख जाएंगे, लेकिन उनके जैसा गंदा दिखने वाला एक भी ब्राह्मण नहीं मिलेगा।"


प्रियंका की वर्जिनिटी पर उठा चुके सवाल :

सितंबर 2013 में केआरके ने प्रियंका चोपड़ा को निशाने पर लेते हुए उनकी वर्जिनिटी पर सवाल उठाया था। उन्होंने ट्वीट करते हुए पूछा था, "मैं प्रियंका चोपड़ा जी मैडम जी से सिर्फ एक सवाल पूछना चाहता हूं, क्या वे भी राखी सावंत की तरह वर्जिन है।" इतना ही नहीं इस दौरान केआरके ने प्रियंका की फिल्म जंजीर का भी मजाक उड़ाया था। उन्होंने अपने ट्वीट में कहा था कि बेचारी प्रियंका चिल्ला-चिल्लाकर कहती रहीं, पैसा फेंक तमाशा देख, लेकिन लोगों ने कहा, फ्री में भी दिखाओ तो भी नहीं देखना। इतना ही नहीं, कुछ दिनों बाद केआरके ने पिग्गी चोप्स को पनौती तक कह डाला था।


हुमा कुरैशी से की सेक्स की मांग :

कमाल आर खान ने उस वक्त तो हद ही कर दी, जब उन्होंने बॉलीवुड एक्ट्रेस हुमा कुरैशी से खुलेआम सेक्स की मांग की।उन्होंने अपने ट्विटर अकाउंट पर लिखा था, "मैं आपसे एक सवाल पूछना चाहता हूं, यदि आप बुरा न मानें तो। मैं आपके साथ सेक्स करना चाहता हूं...हाहाहाहा" उन्होंने आगे लिखा था, "सिर्फ हुमा कुरैशी और 'कहके लूंगा' डायलॉग्स की खातिर मैं दूसरी बाद गैंग्स ऑफ़ वासेपुर देख रहा हूं।"


महेश भट्ट और एकता पर साध चुके निशाना :

कमाल राशिद खान डायरेक्टर-प्रोड्यूसर महेश भट्ट और एकता कपूर को भी निशाने पर ले चुके हैं। एक बार उन्होंने अपने ट्विटर अकाउंट पर लिखा था, "यदि महेश भट्ट देश के राष्ट्रपति हों और एकता कपूर प्रधानमंत्री, तो वे हर सुबह सनी लियोनी जैसी 1000 पोर्न स्टार्स से रोज इंडिया गेट पर परेड करवाएं।"


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सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं ऐसे कार्टून

कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया की दुनिया में तेजी से वायरल हो रहे हैं. इन तस्वीरों में चुनाव नतीजों से पहले देश की बदलती सियासत और पार्टियों व नेताओं द्वारा अपने अंतरात्मा की मनचाही आवाज सुनने को लेकर जमकर चुटकी ली जा रही है. पेश हैं ऐसी ही कुछ तस्वीरें...


 ये कार्टून तब सोशल मीडिया में छाया जब कभी कांग्रेस के करीबी रहे वरिष्ठ पत्रकार और लेखक एमजे अकबर बीजेपी में शामिल हो गए.




जब बीजेपी ने अपना चुनावी गीत लॉन्च किया था तब ये कॉर्टून सोशल मीडिया पर पोस्ट किया गया. पार्टी के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली ने चुनावी गीत 'मैं देश नहीं झुकने दूंगा' को लॉन्च किया था. इस कार्टून में इसी पर चुटकी ली गई है.


बाबा जी का ठुल्लू' बोलना लोगों को तो कूल लगने ही लगा है, लेकिन इसके साथ-साथ 'कॉमेडी नाइट्स विद कपिल' के होस्ट कपिल शर्मा के इस जुमले का इस्तेमाल अब सोशल मीडिया व इस पर वायरल होने वाले कार्टूनों में भी जमकर होने लगा है. ये कार्टून भी इसी की मिसाल है.


लोकसभा चुनाव से पहले मोदी लहर और बीजेपी की मजबूत स्थिति पर आधारित इस कार्टून को भी सोशल मीडिया पर काफी पंसद किया गया. इसमें मोदी को एक डॉक्टर बनाकर पेश किया गया है.


चुनाव प्रचार में कुछ ऐसी होर्डिंग भी लगाई गईं जिसमें दूसरी पार्टियों और राजनेताओं पर निशाना साधा गया. ये होर्डिंग भी उसी का उदाहरण है.


जब आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर  चुनाव प्रचार के दौरान हमला हुआ, तब ये कार्टून वायरल हुआ.
इस कार्टून को भी सोशल मीडिया पर काफी पसंद किया गया.

इस कार्टून के जरिए मोदी लहर पर चुटकी लेने की कोशिश की गई है



16 मई के बाद क्या होगा? सोशल मीडिया पर इस कार्टून को भी काफी पंसद किया गया.


मोदी, राहुल, केजरीवाल, सोनिया ही नहीं कार्टूनों में ममता बनर्जी पर भी चुटकी ली गई है.


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पुरुषों की पैंट पर ताला लगा दोः हाई कोर्ट

पब्लिक प्लेस पर पेशाब करने की हरकतों से आजिज हाई कोर्ट ने हल्के-फुल्के लहजे में कहा, 'हर पुरुष की पैंट की जिप में एक ताला लगा देना चाहिए और उसकी चाबी घर पर रखनी चाहिए।'

जस्टिस प्रदीप नंदराजग और जस्टिस दीपा शर्मा की बेंच ने इस बात पर परेशानी जाहिर की कि इस बुरी आदत को रोका नहीं जा पा रहा है। हालांकि कोर्ट ने इस बारे में अधिकारियों को कोई निर्देश देने से इनकार कर दिया। इस मुद्दे पर हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई थी। याचिका में मांग की गई थी कि अधिकारियों को निर्देश दिया जाए कि लोगों को पेशाब से दीवारें गंदी करने से रोके। कोर्ट ने कहा कि हम ऐसा कोई निर्देश नहीं दे सकते।

कोर्ट ने कहा, 'सार्वजनिक स्थानों पर पेशाब की समस्या को किसी और मंच पर हल करना होगा। निश्चित तौर पर कोर्ट किसी व्यक्ति को यह नहीं कह सकता कि घर से निकलते वक्त अपनी जिप बंद रखे।' 


कोर्ट ने इस बात पर निराशा जाहिर की कि दीवारों पर देवताओं की तस्वीरें लगाने से भी पुरुषों को नहीं रोका जा सकता। जज ने कहा, 'तस्वीरों से यह बात साबित होती है कि लोग अपने ब्लैडर का प्रेशर हल्का करने के लिए अपने देवताओं की तस्वीरों पर भी पेशाब करने से नहीं चूकते।'

याचिका में कुछ दीवारों पर लगी देवताओं की तस्वीरें हटाने का भी आग्राह था। ये तस्वीरें इसीलिए लगाई गई थीं कि पुरुषों को वहां पेशाब करने से रोका जा सके। लेकिन कोर्ट ने तस्वीरें हटाने का आदेश देने से भी इनकार कर दिया। बेंच ने कहा, 'किसी को भी अपने घर या कंपाउंड की दीवारों पर देवताओं की तस्वीरें लगाने से नहीं रोका जा सकता।'

याचिकाकर्ता मनोज शर्मा इस बात से दुखी हैं कि लोग देवताओं की तस्वीरों वाली दीवार पर पेशाब कर रहे हैं। उन्होंने इसके समर्थन में तस्वीरें भी पेश की थीं। लेकिन कोर्ट ने बस इतना ही कहा कि अपना प्रेशर हल्का करने के लिए किसी भी दीवार का सहारा लेने वालों की आदत बहुत ज्यादा परेशान करने वाली है। 
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मोदी को जिताना हमारे लिए शर्म की बात होगी: काशीनाथ सिंह



… ब्राह्मणवाद के साथ तो हम लोग जीते ही आये हैं, उसे बरदाश्‍त करने की हमारी आदत है, कुछ और सह लेंगे। लेकिन फासीवाद तो मौका ही नहीं देगा…

लोकसभा चुनाव में बनारस से नरेंद्र मोदी की उम्‍मीदवारी पर बीबीसी को दिये अपने साक्षात्‍कार के कारण अचानक चर्चा में आये हिन्दी के वरिष्‍ठ लेखक काशीनाथ सिंह शहर के उन विरल लोगों में हैं, जिनके यहाँ पत्रकारों का मजमा लगा है। दिल्‍ली से बनारस पहुँचने वाला हर पत्रकार काशीनाथ सिं‍ह का साक्षात्‍कार लेना चाहता है, लिहाजा सबको वे क्रम से समय दे रहे हैं। प्रस्‍तुत है अरविंद केजरीवाल की रैली से ठीक एक दिन पहले 24 मार्च को काशीनाथ सिंह से उनके घर पर हुयी अभिषेक श्रीवास्‍तव की बातचीत के प्रमुख अंश।

बीबीसी वाले इंटरव्‍यू का क्‍या मामला था… अचानक आपकी चौतरफा आलोचना होने लगी?

(हंसते हुये) उन्‍होंने जो दिखाया वह पूरी बात नहीं थी। बात को काटकर उन्‍होंने प्रसारित किया जिससे भ्रम पैदा हुआ। मैं आज से नहीं बल्कि पिछले पांच दशक से लगातार फासीवादी ताकतों के खिलाफ बोलता-लिखता रहा हूँ। मेरा पूरा लेखन सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ रहा है। आप समझिए कि अगर काशी के लोगों ने इस बार मोदी को चुन लिया तो हम मुंह दिखाने के लायक नहीं रह जायेंगे। यह हमारे लिये शर्म की बात होगी।

वैसे चुनाव का माहौल क्‍या है? आपका अपना आकलन क्‍या है?

देखिए, ये आज की बात नहीं है। साठ के दशक में काशी हिन्दू विश्‍वविद्यालय में चला आंदोलन हो या फिर बाबरी विध्‍वंस के बाद की स्थिति, बनारस के लोग हमेशा से यहाँ की गंगा-जमुनी संस्‍कृति की हिफ़ाज़त के लिये खड़े रहे हैं। हम लोग जब साझा संस्‍कृति मंच की ओर से मोर्चा निकालते थे, तो नज़ीर बनारसी साहब मदनपुरा में हमारा स्‍वागत करने के लिये खड़े होते थे और यहाँ के मुसलमानों को अकेले समझाने में जुटे रहते थे। बाद में खुद नज़ीर साहब के मकान पर हमला किया गया, फिर भी वे मरते दम तक फासीवाद के खिलाफ़ खड़े रहे। आपको याद होगा कि दीपा मेहता आई थीं यहाँ पर शूटिंग करने, उनके साथ कैसा सुलूक किया गया। उस वक्‍त भी हम लोगों ने मीटिंग की थी और परचा निकाला था।

इस बार की क्‍या योजना है? कोई बातचीत हुयी है लेखकों से आपकी?

लगातार फोन आ रहे हैं। दुर्भाग्‍य है कि कम्‍युनिस्‍ट पार्टियों ने अपनी करनी से अपनी स्थिति खराब कर ली, वरना माहौल कुछ और होता। हम लोग इस बार भी लेखकों, रंगकर्मियों, संस्‍कृतिकर्मियों, फिल्‍मकारों से लगातार संवाद में हैं। एक परचा ड्राफ्ट किया जा रहा है। जल्‍द ही सामने आयेगा। कोशिश है कि कुछ नामी-गिरामी चेहरों को कुछ दिन बनारस में टिकाया जाये। समस्‍या यह है कि बनारस से बाहर के लेखक नरेंद्र मोदी के खतरे की गंभीरता को नहीं समझ पा रहे हैं। कल ही पंकज सिंह से बात हुयी। उनका फोन आया था। कह रहे थे कि चिंता मत कीजिए, भाजपा सरकार नहीं बनेगी। मुझे लगता है कि यह नि‍श्चिंतता कहीं घातक न साबित हो।

आप एक ऐसे लेखक हैं जो लगातार अपनी ज़मीन पर बना रहा और जिसने स्‍थानीय पात्रों को लेकर रचनाएं लिखीं। बनारस के स्‍वभाव को देखते हुये क्‍या आपको लगता है कि यहाँ का मतदाता मोदी के उसी शिद्दत से फासीवाद से जोड़कर देख पा रहा है?

देखिए, बनारस यथास्थितिवादी शहर है। पुरानी कहावत है- कोउ नृप होय हमें का हानि। यहाँ के लोग इसी भाव में जीते हैं। इस बार हालाँकि यह यथास्थितिवाद फासीवाद के पक्ष में जा रहा है। लोगों के बीच कोई काम नहीं हो रहा। आखिर उन तक अपनी बात कोई कैसे पहुँचाए। जिस अस्सी मोहल्‍ले पर मैंने किताब लिखी, अब वहाँ जाने लायक नहीं बचा है। मुझे दसियों साल हो गये वहाँ गये हुये। सब भाजपाई वहाँ इकट्ठा रहते हैं। लोगों के बुलाने पर जाता भी हूँ तो पोई के यहाँ बैठता हूँ। दरअसल, लोगों को लग रहा है कि बनारस से इस बार देश को प्रधानमंत्री मिलना चाहिए। यह एक बड़ा फैक्‍टर है। लोगों को लग रहा है कि लंबे समय बाद बनारस इतने लाइमलाइट में आया है, बड़े नेता यहाँ से खड़े हो रहे हैं। लोगों को लगता है कि मोदी को जितवाना उनकी प्रतिष्‍ठा का प्रश्‍न है।

लेकिन जो बात टीवी चैनलों के माध्‍यम से आ रही है, जिस हवा की बात की जा रही है, वह तो अस्‍सी और पक्‍का महाल के इर्द-गिर्द ही है। बाकी बनारस का क्‍या?

ये बड़ी विडम्‍बना है। असल में "काशी का अस्‍सी" इतनी चर्चित है कि यहाँ जो कोई नया अधिकारी आता है, उसे ही पढ़कर बनारस को समझता है। अभी कल ही दिल्‍ली से एक पत्रकार आई थीं और किताब का जि़क्र कर रही थीं। जिस अस्‍सी के बारे में मैंने लिखा है किताब में, वह बहुत पुरानी बात हो चुकी। वह अस्‍सी अब वैसा नहीं रहा। और बनारस सिर्फ अस्‍सी नहीं है। विडम्‍बना है कि इस किताब को पढ़कर लोग सोचते हैं कि अस्‍सी से ही बनारस का मूड जान लेंगे। अब इसका क्‍या किया जाये।

मोदी अगर जीत गये तो क्‍या माहौल खराब होने की आशंका है?

बेशक, लेकिन एक आशंका लोगों के मन में यह भी है कि मोदी इस सीट को रखेंगे या वड़ोदरा चले जायेंगे। जहाँ तक मेरा मानना है, बनारस का य‍थास्थितिवाद फासीवाद की ज़मीन तो तैयार करेगा लेकिन यही प्रवृत्ति इस शहर को फासीवाद से अछूता बनाए रखेगी। लेकिन सवाल सिर्फ बनारस का नहीं, देश का है। अगर मोदी के खिलाफ़ कोई संयुक्‍त उम्‍मीदवार सारी पार्टियां मिलकर उतार देतीं, तो शायद उनकी लड़ाई मुश्किल हो जाती। अरविंद केजरीवाल को ही समर्थन दिया जा सकता था। पता नहीं कांग्रेस की क्‍या स्थिति है, आप लोग बेहतर जानते होंगे।

कांग्रेस से तो दिग्विजय सिंह का नाम चल रहा है। संकटमोचन के महंत विश्‍वम्‍भरजी और काशी नरेश के लड़के अनंतजी की भी चर्चा है…।

दिग्विजय सिंह का तो पता नहीं, लेकिन अगर विश्‍वम्‍भर तैयार हो गये तो खेल पलट सकता है। अनंत नारायण तो तैयार नहीं होंगे। विश्‍वम्‍भर के नाम पर शहर के ब्राह्मण शायद भाजपा की जगह कांग्रेस के साथ आ जायें, हालांकि विश्‍वम्‍भर के ऊपर न लड़ने का दबाव भी उतना ही होगा। अगर विश्‍वम्‍भर वाकई लड़ जाते हैं, तो यह अच्‍छी खबर होगी।

हां, इधर बीच ब्राह्मणों में कुछ नाराज़गी भी तो है भाजपा को लेकर… ?

ये बात काम कर सकती है। हो सकता है कि भाजपा के वोट आ भी जायें, लेकिन एनडीए बनाने के क्रम में मोदी छँट जायेंगे। पता नहीं राजनाथ के नाम पर सहमति बनेगी या नहीं, हालांकि राजनाथ ने काफी सधी हुयी रणनीति से ठाकुरों को पूर्वांचल में टिकट दिये हैं। संघ के भीतर तो ठाकुरों को लेकर भी रिजर्वेशन है ही। हां, ब्राह्मण अगर नाराज़ है तो मुझे लगता है कि हमें एक ऐसे उम्‍मीदवार की कोशिश करनी होगी जो भाजपा के ब्राह्मण वोट काट सके।

मतलब ब्राह्मणवाद इस बार फासीवाद की काट होगा?

(हंसते हुये) हो सकता है… ब्राह्मणवाद के साथ तो हम लोग जीते ही आये हैं, उसे बरदाश्‍त करने की हमारी आदत है, कुछ और सह लेंगे। लेकिन फासीवाद तो मौका ही नहीं देगा।

क्‍यों नहीं ऐसा करते हैं कि हिन्दी के व्‍यापक लेखक, बुद्धिजीवी, संस्‍कृतिकर्मी समुदाय की ओर से आप ही प्रतीक के तौर पर चुनाव लड़ जायें मोदी के खिलाफ़?

(ठहाका लगाते हुये) देखो, हमें जो करना है वो तो हम करेंगे ही। हमने पहले भी ऐसे मौकों पर अपनी भूमिका निभाई है, आज भी हम तैयारी में जुटे हैं। अभी महीना भर से ज्‍यादा का वक्‍त है। उम्‍मीद है दस-बारह दिन में कोई ठोस कार्यक्रम बने। मैंने प्रलेस, जलेस, जसम आदि संगठनों से और खासकर शहर के रंगकर्मियों से बात की है। शबाना आज़मी, जावेद अख्‍़तर, गुलज़ार आदि को शहर में लाने की बात चल रही है। कुछ तो करेंगे ही, चुप नहीं बैठेंगे।

चुनाव और मोदी के संदर्भ में नामवरजी से कोई संवाद…?

नहीं, अब तक तो उनसे कोई बात नहीं हुयी है। देखते हैं… करेंगे।

(शुक्रवार पत्रिका में प्रकाशित और साभार)

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बनारस शिव से कभी मुक्त नही, जब से आये कैलाश न गये। बनारसी की मस्ती को लिखा नही जा सकता अनुभव होता है। अद्भूद है ये शहर जिन्दगी जीनेका तरीका कुछ ठहरा हुआ है पर सुख ठहराव में है द्रुतविलंबित में नही. मध्यम में है इसको जीनेवाला है यह नगर। नटराज यहां विश्वेश्वर के रुप में विराजते है इसलिये श्मशान पर भी मस्ती का आलम है। जनजन् शंकरवत् है। इस का अनुभव ही आनन्द है ये जान कर जीना बनारस का जीना है जीवन रस को बना के जीना है।
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काल हर !! कष्ट हर !! दुख हर !! दरिद्र हर !! हर हर महादेव !! ॐ नमः शिवाय.. वाह बनारस वाह !!